अठारहवीं शताब्दी का वार्टिन महल, बाद में नवगोथिक तत्वों से विस्तारित।
श्लॉस वार्टिन जर्मनी के वार्टिन का 18वीं शताब्दी का दो-मंजिला मनोर-भवन है। इसे मूलतः बारोक शैली में बनाया गया था, और 19वीं शताब्दी में नव-गोथिक कोने के बुर्ज तथा गोथिक शैली का प्रवेशद्वार जोड़ा गया। पुनर्एकीकरण के बाद इसका नवीनीकरण शुरू हुआ और इसे कला, संस्कृति व विज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
श्लॉस वार्टिन जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक हेरनहाउस है। वार्टिन का यह भवन 18वीं शताब्दी का है। यह दो मंजिला हेरनहाउस है, जिसके साथ एक सम्मान प्रांगण है, और इसे मूल रूप से बारोक शैली में बनाया गया था। 19वीं शताब्दी में इसमें नव-गॉथिक कोने के बुर्ज और एक गोथिक शैली का प्रवेशद्वार जोड़ा गया। 1933 के बाद इस हेरनहाउस में एक गाउफ्यूररशूले स्थापित की गई थी। जर्मन पुनर्एकीकरण के बाद स्टिफ्टुंग कोलेगियम वार्टिन ने पुराने हेरनहाउस, श्लॉस वार्टिन, का नवीनीकरण शुरू किया, ताकि उसे जर्जर होने से बचाया जा सके। इस फाउंडेशन का लक्ष्य श्लॉस वार्टिन को यूरोपीय अकादमी संघ के उपयोग के लिए उपयुक्त बनाना और उसे कला, संस्कृति और विज्ञान के एक केंद्र के रूप में विकसित करना है। महल में हांस-योआखिम मेंगेल रहते हैं, जो यूरोपीय अकादमी ई. वी. के अध्यक्ष और निदेशक के रूप में कार्य करते हैं। उनके अनुसार अकादमी का उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ अध्ययन सप्ताहांत आयोजित करना तथा अन्य वैज्ञानिक, कलात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ करना है। 2023 में श्लॉस परियोजना के सह-संस्थापक चार्ल्स एलवर्थी का निधन हो गया।